Birth of Jesus Christ | येशु का जन्म कैसे हुआ, जाने पूरी सत्य घटना

Praise the Lord. And Merry Christmas. Jesus Birth Story in Hindi : 25 दिसंबर यानी क्रिसमस(Christmas) मसीही लोगों का सबसे बड़ा त्यौहार है। और यह जगत के उध्दारक येशु मसीह के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। येशु मसीह, उस रिश्ते को दोबारा जोड़ने और मजबूत करने के लिए आया, जो पाप की वजह से टुट गया था। क्योंकि परमेश्वर यह चाहता था कि, जगत का हर इंसान अनन्त जीवन पाए।


इस लेख में हम आपके साथ येशु मसीह की जन्म की कहानी साझा कर रहे हैं। यह बाईबल के मत्ती अध्याय 1, 2 और लूका अध्याय 1, 2 में से ली गई है।

ईसा मसीह का जन्म, Birth of Jesus in Hindi


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यीशु मसीह की जन्म की कहानी

* स्वर्गदूत ने मरियम को दी यीशु के जन्म की खबर


परमेश्वर की ओर से भेजा गया जिब्राइल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में मरियम नामक एक कुंवारी के पास आता है, जिसकी मंगनी यूसुफ नामक दाऊद के घराने के एक पुरूष के साथ हुई थी। और भीतर आकर स्वर्गदूत मरियम से कहता है, 
"आनंद और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है।" 

स्वर्गदूत की यह वाणी सुनकर मरियम घबरा जाती है। और सोचने लगती है कि, यह किस प्रकार का अभिवादन है। इसी बीच स्वर्गदूत मरियम से कहता है, 
"हे मरियम, भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। और देख तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु(Jesus) रखना। वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अंत न होगा।"
स्वर्गदूत की यह बातें सुनकर मरियम स्वर्गदूत से कहती है कि,
"यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं?"
मरियम के सवालों के जवाब में स्वर्गदूत कहता है कि,
"पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिए वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। और देख, तेरी कुटुंबिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होनेवाला है।यह उसका जो बांझ कहलाती थी, छठवां महीना है। क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता।"
स्वर्गदूत की इन सारी बातों को सुनकर अंत में मरियम कहती है, 
"देख, मैं प्रभु की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो।"
मरियम की ये बात सुनकर स्वर्गदूत वहां से चला जाता है।


स्वर्गदूत ने यूसुफ को दी येशु के जन्म की खबर


जब मरियम की मंगनी यूसुफ से हुई तो उनके इकट्ठे होने से पहले ही वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पायी गयी, तो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था, उसको बदनाम करना न चाहकर उसे चुपके से त्यागने की मनसा की। नासरत का बढ़ई यूसुफ जो धर्मी था, यह जानकर व्याकुल हो उठा के कुंवारी मरियम जिसके साथ उसकी मंगनी हुई थी, शीघ्र ही सन्तान जनेगी। 

जब वह इन बातों पर विचार कर ही रहा था कि, प्रभु का स्वर्ग दूत उसे स्वप्न में दिखलायी दिया, और यूसुफ से कहा, 
"हे यूसुफ दाऊद की संतान तू अपनी पत्नी मरियम को अपने यहाँ लाने से मत डर क्योंकि जो उसके गर्भ में है वह पवित्र आत्मा की ओर से है। वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार करेगा।"

सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत के आज्ञा अनुसार अपनी पत्नी मरियम को अपने यहां ले आया।



येशु का जन्म


उन दिनों में औगूस्तुस कैसर की ओर से आज्ञा निकली कि, सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएं। और कानून के अनुसार सब लोग नाम लिखवाने के लिए अपने अपने नगर को जाने लगे। सो यूसुफ भी अपनी पत्नी मरियम के साथ जो गर्भवती थी नाम लिखवाने के लिए गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बेतलेहेम को गया, क्योंकि वह दाऊद के घराने और वंश का था।


बेतलेहेम में यूसुफ और मरियम को किसी भी सराय में जगह नहीं मिली, क्योंकि आज्ञा के अनुसार हर कोई अपने अपने नगर नाम लिखवाने आया था। सो यूसुफ और मरियम को एक गौशाला में रहने की जगह मिली। और यहां रहते हुए मरियम के जनने के दिन पूरे हुए। और उसने अपने पहिलौठे पुत्र को जन्म दिया, और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा।

गड़रियों ने किया येशु का दर्शन


जहां तक इस पृथ्वी के माता पिता का सम्बन्ध था, यीशु यद्यपि राजवंश का था दाऊद के घराने का था। परंतु उसका स्वागत करने के लिये राजभवन से कोई नहीं आया था।


उस देश में कितने ही गड़रिये रहते थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुंड की रखवाली करते थे, और प्रभु का दूत उनके पास आ खड़ा हुआ और प्रभु का तेज उनके चारों ओर चमका, वे बहुत डर गये। तब स्वर्गदूत ने उनसे कहा, 
"डरो मत, क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिये होगा कि, आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। और इसका तुम्हारे लिये यह पता है कि, तुम एक बालक कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे।"
तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया कि,
"आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शांंती हो।"

जब स्वर्गदूत उनके पास से चला गया, तो गड़रिये आपस में कहने लगे कि, 
"आओ हम बेतलेहेम जाकर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है देखे"

गड़रिये तुरंत बैतलहम को जाकर यूसुफ, मरियम और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। और इन्हें देखकर गड़रियों ने वह सब बातें बयां की जो उन्हें स्वर्गदूत ने बताई थी। गड़रियों की सारी बातों को सुनकर वहां मौजूद हर कोई चौकन्न हुआ। पर मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। गड़रिये स्वर्गदूत ने जैसा कहा था ठीक वैसा ही सुनकर और देखकर परमेश्वर की महिमा और स्तुति करते हुए वापस लौट गए।

अतः मरियम और यूसुफ को गड़रियों के आगमन से प्रोत्साहन ही मिला, विशेषतया उस समय जब उन्हें यह मालूम हुआ कि स्वर्गदूतों ने उनका पथ-प्रदर्शन किया है।



ज्योतिषी आए येशु का दर्शन करने


येशु के जन्म के समय यहूदिया में हेरोदेस राजा का शासन था। उस वक्त पूर्व से चलते हुए कोई ज्योतिष यरूशलेम में यह आशा लेकर आये थे कि, बालक राजा का जन्म राजभवन में हुआ होगा। जब उन्हें यह मालूम हुआ कि न राजा और न ही याजक लोगों को इस महान घटना का जो यरूशलेम में घटी है, पता है, तो उन्हें बहुत ही आश्चर्य हुआ। 

ज्योतिषीगण निःसन्देह प्राचीन हस्तलिपियों के जानकार थे, तथा इस्राएल में उद्धारकर्त्ता के जन्म लेने की भविष्यवाणी को जानते थे। उन्होंने उस रहस्यमय तारा के रहस्य का पता लगाने का दृढ़ संकल्प कर लिया होगा, जो रात को आकाश में प्रगट हुआ था। और क्या यह उस ज्योति का प्रतीक नहीं है जो अन्धकार को भेद कर मनुष्य के हृदयों को ज्योतिमय कर सकता यह जानने के लिए वे तारे का अनुकरण कर बढ़ते गए।

ज्योतिषियों के आगमन का समाचार सुनकर हेरोदेस राजा उनके आने के कारण की छान बीन करने लगा। ज्योतिषियों ने भी बिना हिचकिचाये उनसे यह जानना चाहा कि बालक राजा का जन्म कहाँ हुआ है? ज्योतिषियों ने पुछा कि, "यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आये हैं।"

ज्योतिषियों के इब बात को सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया। और राजा ने लोगों के सब महायाजकों और शास्त्रियों को इकट्ठे करके उन से पूछा, कि मसीह का जन्म कहाँ होने वाला है? महायाजकों और शास्त्रियों ने उस से कहा, 
"यहूदिया के बैतलहम में, क्योंकि भविष्यद्वक्ता के द्वारा
यों लिखा गया है कि, हे बैतलहम, जो यहूदा के देश में है, तू किसी रीति से यहूदा के अधिकारियों में सब से छोटा नहीं; क्योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा।"

तब हेरोदेस ने ज्योतिषियों को चुपके से बुलाकर उन से पूछा कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था। और उस ने यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा कि "जाकर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उस को प्रणाम करूं।"

वे राजा की बात सुनकर चले गये। और देखो जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था वह उनके आगे आगे चला, और जहाँ बालक था, उस जगह के ऊपर पहुंचकर ठहर गया। उस तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए। और उस घर में पहुँचकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और मुँह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया और अपना-अपना थैला खोलकर उसको सोना, और लोहबान, और गंधरस की भेंट चढ़ाई।  इसके बाद एक स्वप्न में ईश्वर से चेतावनी पाकर, कि बालक का पता न बताना, वे अन्य मार्ग से होकर अपने देश को लौट गए। जो उपहार वे पीछे छोड़ गये, ये भेंट यीशु के लिये प्रथम भेंट थी।


मिस्र को पलायन


ज्योतिषियों के चले जाने के बाद प्रभु के दूत ने स्वप्न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, “ उठ; उस बालक को और उसकी माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा और जब तक मैं तुझसे न कहूँ तब तक वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूंढने पर है कि उसे मरवा डाले"।

यूसुफ रात ही को उठकर बालक और उसकी माता मरियम को लेकर मिस्र को चला गया। और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा।

राजा हेरोदेस का क्रोधित होना


बालक राजा के बारे में सूचना देने के लिये ज्योतिषियों के यरूशलेम न पहुचने पर राजा हेरोदेस अत्यन्त क्रोधित हो
गया। उसने बालक मसीह को नष्ट करने के लिए दृढ संकल्प कर लिया। और बैतलहम और आस पास के दो वर्ष से कम आयु के जितने भी बालक थे, सबको मार डालने की आज्ञा दे दी। क्योंकि उसे अपने सिंहासन के सम्भावित प्रतिद्वन्दी का भय था। निर्दोष बालकों की हत्या के बाद हेरोदेस राजा अत्यन्त कष्टदायक मृत्यु का भागी हुआ।


बालक का अर्पण


मिस्र देश चले जाने से पहले यूसुफ और मरियम यीशु को रीति अनुसार पहिलौठे को परमेश्वर को अर्पण करने के लिए यरूशलेम ले गए । यह घटना यीशु के जन्म के चालीस दिन बाद में हुई "वे उसे यरूशलेम ले गये कि प्रभु के सामने लायें ।

इस अवसर पर हन्ना एक नबिया थी और शिमौन जो एक धर्मी और भक्त था, ईश्वर द्वारा इस अर्पण विधि में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने एकत्रित याजकों और अन्य लोगों के सम्मुख घोषणा की कि, यह बालक प्रतिज्ञा किया हुआ उद्धारकर्ता है। शिमौन ने खुले रूप में घोषणा की "मेरी आंखों ने तेरे उध्दार को देख लिया है जिसे तूने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिए ज्योति और तेरे निज लोग इम्राएल की महिमा हो"

येशु मसीह क्यों आया?


बैतलहम के इस बालक की कहानी से परमेश्वर पिता का महान प्रेम प्रगट होता है। क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन
पाए । यूहन्ना 3:16 यह हमें दर्शाया गया है कि पापी व्यक्ति भी परमेश्वर के साथ मेल मिलाप करके अनन्त जीवन प्राप्त कर सकता है। प्रभु यीशु जन्मे, जिये, मरे तथा जी उठे ताकि हमारे पापों से हमें उद्धार दिलायें।

मसीह ने हमारी मानवता के क्लेशों को स्वयं अनुभव किया, ताकि हमारे जीवन में आने वाले क्लेशों को समझ सके। जिनका जीवन परीक्षाओं तथा पीडाओं से छलनी हो गया है उनसे उसे सहानुभूति है।




तो आशा करते हैं आपको येशु के जन्म की यह सची कहानी जरूर पसंद आई होगी। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा कमेंट में जरूर बताए। और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

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"प्रभु आपको आशीष दे।"
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